प्यार तो अब भी है मगर….

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” सुनो मेरी आँख में  कुछ चला गया है शायद, देखना ज़रा”

शिखर का ध्यान अब भी फोन पर ही था.

” देखो तो मेरी तरफ”

” क्या है”? जैसे ही शिखर रूचि की तरफ मुड़ा, रूचि ने धीरे से उसको गले लगा के उसके गाल पर  एक किस कर दिया.

“ये सब क्या है?”, हैरान होके शिखर इधर उधर देखने लगा, ट्रफ़िक के बीचो बीच, उसने कभी नहीं सोचा था की रूचि ऐसा कुछ करेगी. पीछे कार सीट पर उनका 4 साल को बेटा रिकी भी सोया हुआ था.

” मेने क्या किया? तुम ही  हमेशा बोलते थे ना की तूने मुझे शादी के बाद कभी भी प्यार से सबके सामने गले नहीं लगाया तो लो आज लगा दिया. अब दुबारा मत बोलना की मैं  आपकी बात  नही सुनती”.

आज रूचि का चेहरा खिला हुआ सा लग रहा था, वो सालों पुराना शरारत से भरा, पर शिखर कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि  चाँद आज कहाँ से निकाला है. उसने तो ये सब बातें रूचि से २ साल पहले कहना ही बंद कर दिया था. आज उसको समझ ही नई आया की अब क्या रिक्ट करे.

अपार्टमेंट पहुच कर रूचि सीधा रिकी को उपर सुलने चली गयी, जब शिखर कार पार्क कर के उपर आया तो डाइनिंग टेबल पे छोटा सा केक और वाइन की बॉटल देख के तो उसको तो जैसे विश्वास ही नही हुआ. उसने तुरंत अपने फ़ोन पर आज की तारिक़ देखी, ना तो आज किसी का बर्डे है और ना ही सालगिरह, ” तो आख़िर आज है क्या?? ”

तेज़ी तेज़ी से रूचि बेडरूम से  बाहर आई और बोली” चलो केक काटें, इस से पहले की रिक्कू उठ जाए”

” क्यूँ तुमको तो हमेशा सबके साथ में  ही सेलेब्रेट करना होता है?”, तपाक से शिखर बोला, लेकिन उसकी बेचेनी अब हद से बाहर थी.

” नहीं, आज का ये पल सिर्फ़ मेरा और तुम्हारा है.”

” अच्छा,  ऐसे क्या हुआ था जनाब आज?”

” भूल गए आज ही के दिन, हमने एक दुसरे को अपने प्यार का इज़हार किया था, ठीक आज स १० साल पहले…अरे नजर उठा के तो देखो एक बार, आज तो तुमने मुझपे बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया .. न मेरी इस पिंक कुर्ती पे और मेरा नया काजल ब्लू वाला, वो भी नहीं देखा, तुम को मेरी आँखों में काजल बहुत पसंद है ना?? ”

“अच्छा जी, तभी आज इतना प्यार आ रहा है. वही तो में सोच रहा था, की आजकुछ अलग सी लग रही हो… हम्म इतने साल हो गए न हमें .. पहले मुझे तो याद रहता था पर फिर धीरे-धीरे याद रखना छोड़ दिया.. ताज़्ज़ुब है की तुमको कैसे याद रह गया!!  ”

” जब से तुमने प्यार करना छोड़ दिया मुझको, तब से” ये कहते हुए रूचि ने शिखर का हाथ पकड़ा और सोफे पे बेठ गयी.. ऐसा लगा मानो उसे आज किसी चीज़ की जल्दी नहीं  है.. न तो फटाफट खाना पकाने  की, न वाशिंग मशीन से कपडे निकल के सूखाने की, न घर साफ़ करने की, और न किसी से बात करने की.. वह तो आज बस अपने शिखर के कंधे के ऊपर सर रखके उसके सपनो में खो जाना चाहती है …

” कैसे निकल जाता है न वक़्त, अभी तो जैसे घरवाले माने हो हमारी शादी को, फिर हमारी शादी, जॉब, बच्चा, और देखो १० साल हो गए .और  मैंने आज तुम्हारे लिए कुछ लिया भी नहीं है, परंतु अब तुम मुझसे नाराज मत हो ना. मैं सब कुछ तुम दोनों के लिए ही तो करता हूँ. सच्ची बताना तुम मेरे  साथ खुश तो हो न? ” शिखर ने प्यार से अपना हाथ रूचि के चेहरे पर रखा और देखा की वह रो रही है, इससे पहले की वह कुछ पूछता, रूचि ने उसका हाथ पकड़ा और बोली:

“परेशान मत हो शोना, आज के दिन मैं तुम्हें परेशान नहीं करूंगी. रोती तो में पहले थी, बहुत लंबे समय से पर तुमने कभी ध्यान ही नहीं दिया.. पहले तो दिया भी करते थे पर धीरे धीरे सब छूट गया.. तुम्हारे मेरे पे ध्यान देना और मेरा तुम्हारा पे.. मुझे कुछ याद रहा वह ये की आज खाने में क्या बनाएं , घर का सामान कहाँ से खरीदूं, पानी भरना , ऑफिस का काम घर पे निपटा लूं, जब कोई रिलेटिव घर पे आये तो उनको क्या नया बना के खिलाऊँ.. और फिर मेरी प्रेगनेंसी, अल्ट्रासाउंड, डिलीवरी, रिक्कू का डायपर, सुसु-पॉटी, दूधू और नीनी.. में सब में इतना बिजी हुई की तुमको ही भूल गई…तुम जैसे की मेहमान की तरह रात को ८ बजे आये, खाना खाया, टीवी देखा और सो गए.. फिर सुबह मुझे  तुमसे ज़्यादा तुम्हारे नाश्ते और सॉक्स की चिंता रहने लगी… मैं इतना उलझ गयी की तुम इस फ़ोन में उलझ गए.. और जो कभी मैंने अपना गुस्सा या फ्रसट्रेशन तुमपे निकला भी , तो तुम हमेशा की तरह चुप रहने लगे.. फिर मैं  कभी परेशान हो के रोई भी तो तुमने आँखें भी फेरना शुरू कर दिया…

इस बार मैंने सोचा की मैं  भी तुमसे बात नहीं  करूंगी, पर तुमको पता है न मैं  तुम्हारे बिना एक दिन भी नहीं  रह सकती.. हम आखिरी एक दुसरे से प्यार करते हैं तभी तो हम एक साथ एक छत के नीचे रह रहे हैं.

तो मैंने इस बार सोचा और खूब सोचा, की क्यों  न इस बार पहले मैं अपने आप को बदल के देखती हूँ, क्या पता तुम वही पहले वाले शिखर को जो मेरा इंतज़ार कर रहे हो, बस यही सब कुछ कहना था तुमसे.. और पक्का से, आज से न ही मैं कभी रोउंगी न ही तुम से कोई शिकायत करूंगी”.

” तुम को एसा कुछ नहीं कर ना पड़ेगा क्योंकि मैं  अपनी रूचि को कभी भी रोने नहीं दूंगा और न किसी शिकायत का मौका दूंगा.. आई ऍम सॉरी मेरी पुच्की.. ”

” अरे छोड़ों यह सब, आज से लाइफ फिर से एन्जॉय करते हैं, चलो न केक काटें” रूचि शिखर को डाइनिंग टेबल पे ले गयी.. ” यह पल पुराने दिनों को याद करने और नए पल बनाने के हैं”.

” हा पुच्की जी चलो, आज तो एक गिलास वाइन बनती ही  है” शिखर के चेहरे पर पहले जैसे ताज़गी थी आज..

“मम्मी आप केक लाये हो, मेरे लिए”, पीछे से रिक्कू की आवाज़ आयी..

दोनों शिखर और रूचि एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये और बोले, “हाँ बेबी आज आपका सबसे स्पेशल डे है”…

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